सब्जियां तो बहुत खायी है लेकिन पहाड़ी सब्जी वो भी लिगड़ा, मजा ही कुछ और है।

सब्जियां तो बहुत खायी है लेकिन पहाड़ी सब्जी वो भी लिगड़ा, मजा ही कुछ और है।

बरसात के दिनों में उत्तराखंड में एक सब्जी की डिमांड बढ़ जाती है और वो हैं लिंगड़ा। लिंगड़ा देखने में जितने सुन्दर होते हैं खाने में उतने ही स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं। लिंगड़ा गाड़-गधेरों के आस-पास पाए जाते हैं। विदेशों में भी इसकी काफी मांग होती है और इसे अचार और सलाद के रुप में भी खाया जाता है। तो चलिए आज जानिए लिंगड़े के बारे में ये हैरान करने वाले तथ्य…

उत्तराखण्ड का बहुमूल्य पौधा

लिंगडा (Diplazium esculentum)

सब्जियां तो बहुत खायी है लेकिन पहाड़ी सब्जी वो भी लिगड़ा, मजा ही कुछ और है। पुरातन काल से ही भारत के ऋषि मुनियों एवं पूर्वजो के द्वारा पोष्टिक तथा विभिन्न बिमारियों के इलाज के लिये विभिन्न प्रकार की जंगली का उपयोग किया जाता रहा है।

वैसे तो बहुत सी पहाड़ी सब्जियां खायी है जिसमें से लिगड़ा भी एक है, कुछ लोगो ने इस सब्जी का आनन्द जरूर लिया होगा। यह जंगलो में स्वतः ही उगने वाली फर्न है, जिसका उपयोग हम ज्यादा से ज्यादा सब्जी बनाने तक ही कर पाते हैं। जबकि विश्व में कई देशो में लिगड़ा की खेती वैज्ञानिक एवं व्यवसायिक रूप से भी की जाती है।

विश्व भर में लिंगुडा की लगभग 400 प्रजातियां पाई जाती हैं। लिंगडा उत्तराखण्ड में ही नहीं अपितु एशिया , चाईना तथा जापान में भी खूब पाया जाता है। लिगंडा एक फर्न है जिसका वैज्ञानिक नाम डिप्लाजियम एसकुलेंटम (Diplazium esculentum) है तथा एथाइरिएसी (Athyriaceae) फैमिली से संम्बन्धित है। अलग-अलग जगह पर इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे निंगरू (Ningru) सिक्किम में, लिंगरी हिमाचल प्रदेश में,  उत्तराखण्ड में लिगंडा तथा मलेशिया में Pucuk paku एवं Dhekia नाम से भी जाना जाता है।

यह सामान्यतः नमी वाली जगह पर मार्च से जुलाई के मध्य लगभग 1900m to 2900m समुद्र तल से ऊपर की ऊचांई पर पाया जाता है। लिंगडे का उपयोग सामान्यतः सब्जी बनाने में ही किया जाता है मगर अन्य देशो मे लिगंडे की सब्जी के साथ-साथ अचार तथा सलाद के रूप में बहुत पसंद किया जाता है।

कुछ प्रसिद्ध सालादों में लिगडे को मुख्य धटक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस मुख्य उपयोग के साथ-साथ लिंगडे में उपस्थित मुख्य औषधीय तत्वों तथा प्रचुर मात्रा के मिनरल्स होने के कारण औषधीय दृष्टिकोण से भी जाना जाता है जिसकी वजह से इसे परम्परागत रूप से विभिन्न बीमारियों के निवारण के लिये भी घरेलू उपचार में भी प्रयोग किया है। लिंगुडा फिलिपिन्स के दक्षिणी द्वीप में मुख्य रूप से पाया जाता है तथा Filipino सलाद, sea food, meat का मुख्य अवयव होता है।

लिंगडे मे कैल्शियम, पोटेशियम तथा आयरन प्रचुर मात्रा होने के कारण एक अच्छा प्राकृतिक स्त्रोत भी माना जाता है। सामन्यतः इसमें प्रोटीन 54 ग्राम, लिपिड 0.34 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 5.45 ग्राम, फाइबर 4.45 ग्राम/100 ग्राम, विटामिन C- 23.59 mg , B- Caropenoid 4.65 mg, Phenolic – 2.39 mg/100g पाया जाता है। इसके अलावा इसमें मिनरल्स Fe-38.20 mg, Zin- 4.30 mg, Cu-1.70mg, Mn-21.11, Na- 29.0, K-74.46, Ca- 52.66, Mg- 15.30mg/100g पाये जाते है। इसमें पोटेशियम और कैल्शियम की प्रचूर मात्रा होने के कारण इसकी भरपाई हेतु इसका उपयोग किया जाता है।

मलेशिया विश्वविद्यालय के 2015 के अध्ययन के अनुसार लिंगडा में सबसे अधिक Alpha- Glycosidase inhibitory का गुण होता है जिससे लिंगडा मधुमेह के लिये अत्यंत लाभकारी फर्न है। अफ्रिकन जरनल ऑफ फार्मेसी 2015 में प्रकाशित लेख के अनुसार लिंगडा में मौजूद Flavanoids तथा Sterols की वजह से बेहतर Analgesic गुण पाये जाते है।

लिगड़ा ताजा तथा पकने के बाद भी Antioxidative गुण तथा Alpha-tocopherol गुण भरपूर पाये जाता है। मलेशिया जरनल ऑफ माइक्रोब्यालाजी के 2011 के अध्ययन के अनुसार अगर लिंगुडा को Poultry Feed के साथ मिलाया जाय तो यह Poultry में सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा जनित बीमारियों को कम कर देता है। लिगड़ा की पत्तियों का पाउडर औद्योगिक रूप से बायोसेन्थेसिस ऑफ सिल्वर नैनो पार्टीकल्स (Ag NPs) के लिये प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि लिगड़ा की पत्तियां Reductant तथा स्टेबलाईजर का कार्य करती हैं।

राज्य के परिप्रेक्ष्य में अगर लिगड़ा की खेती वैज्ञानिक तरीके से व व्यवसायिक रूप में की जाय तो यह राज्य की आर्थिकी का एक बेहतर प्रायः बन सकता है।

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