जानकारी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है और 1936 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। इसका नाम “जिम कॉर्बेट” के नाम पर रखा गया था जिम कॉर्बेट ने  इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईRead More →

जब भी पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) की बात आती है, तो उत्तराखंड (Uttarakhand) के पर्वतीय क्षेत्र में 80 के दशक में चले एक अनूठे आन्दोलन ‘चिपको आंदोलन’ (Chipko Andolan) का जिक्र होना स्वाभाविक है। वन संरक्षण के इस अनूठे आंदोलन ने न सिर्फ देश भर में पर्यावरण के प्रति एकRead More →

पहले रंगवाली पिछौड़ा घर पर ही मलमल, कौटन वाईल, चिकन फ़ैब या किसी अन्य हल्के सूती फ़ैब्रिक पर रंगकर बनाया जाता था। सबसे पहले सफ़ेद सूती कपड़े को धोकर सुखाया जाता था तथा फ़िर उसे पीले रंग से डाई किया जाता था। रगने के लिए मुख्य रूप से दो रंगRead More →

भारतीय महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में दुपट्टा (ओढ़नी) विशेष महत्व रखता है, देश के अन्य अंचलों की तरह ही उत्तराखण्ड के विभिन्न अंचलों में यह परंपरागत रूप से महिलाओं द्वारा पहना जाता है। कुमाऊं अंचल में यहां की स्थानीय भाषा में पिछोड़ा कहते हैं, पिछौड़ा अर्थात दुपट्टा या ओढनी। यहांRead More →

नन्दा देवी राजजात भारत के उत्तराखंड राज्य में होने वाली एक नन्दा देवी की एक धार्मिक यात्रा है। यह उत्तराखंड के कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। आमतौर पर हर 12 वर्ष पर होती है, जो अन्तिम राजजात यात्रा हुवी थी वो सन् 2014 में हुयी थी,Read More →

  फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) जिसे आम तौर पर सिर्फ फूलों की घाटी कहा जाता है, भारत का एक राष्ट्रीय उद्यान है जो उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। यूनेस्को ने नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को सम्मिलित रूपRead More →

जिस किलमोड़ा के पौधों को कंटीली झाड़ी कहकर पहाड़ में उपेक्षित छोड़ दिया जाता है, उसी से दुनियाभर में जीवन रक्षक दवाएं तैयार हो रही हैं। जड़ी-बूटी के उत्पादन व संरक्षण में जुटे बागेश्वर के एक ग्रामीण ने किलमोड़ा की झाड़ियों से तेल तैयार किया है। खास बात यह हैRead More →

हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में एक नायाब जड़ी मिलती है कीड़ा-जड़ी  जिसका उपयोग भारत में तो नहीं होता लेकिन चीन में इसका इस्तेमाल प्राकृतिक स्टीरॉयड की तरह किया जाता है।  इस जड़ी की यह उपयोगिता देखकर पिथौरागढ़ और धारचूला के इलाक़ों में बड़े पैमाने पर स्थानीय लोग इसका दोहनRead More →

बाल मिठाई उत्तराखंड की मशहूर मिठाई है। आपने अगर इसका नाम सुना है या पहले कभी खाया है तो आपको इसके स्वाद के बारे में हमें बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आपने इसे पहले कभी नहीं खाया है तो जान लें इसे घर पर बनाने की आसान विधि।Read More →

होली सैकड़ों वर्षों  से रंग-गुलाल, मस्ती और पकवानों का त्योहार रहा है। उत्तराखंड का संस्कृति सचेतन इलाका कुमाऊं और गढ़वाल-दोनों जगह पवित्र पौधे की डाल लाकर लगाने, पूजने, चीर बांधने-बांटने,बैठी-खड़ी होले का फर्क निभाने और महिलाओं का स्वांग निभाने आदि अनेक ऐसी चीजें हैं जो बहुत ही खास है और होली में गायन  इसेRead More →