उत्तराखंड के इस मंदिर में विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं।

उत्तराखंड के इस मंदिर में विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं।

आप शायद ही ये जानते होंगे कि उत्तराखंड में एक ऐसा स्थान भी है, जहां मां दुर्गा साक्षात् प्रकट हुई थीं। देवभूमि का ये स्थान भारत का एकमात्र और दुनिया का तीसरा ऐसा स्थान है, जहां खास चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं। खुद नासा के वैज्ञानिक भी इस पर शोध कर चुके हैं।

जी हां उत्तराखंड के अल्मोड़ा में कसाय पर्वत पर मौजूद मां दुर्गा के मंदिर में अनोखी शक्तियां मौजूद हैं। यहां आने वाले भक्त आसानी से सैकड़ों सीढ़ियां बिना किसी थकावट के ही चढ़ जाते हैं। मान्यता है कि ढाई हजार साल पहले मां दुर्गा ने दो राक्षसों का वध करने के लिये कात्यायनी रूप में अवतार लिया था। तब से इस जगह को विशेष स्थान के रूप में जाना जाता है।

हिन्दुस्तान के लोग शायद ही ये जानते होंगे कि ये स्थान जितना प्राचीन और धार्मिक महत्व का है उतना ही वैज्ञानिक लिहाज से भी अहम है।

नासा के वैज्ञानिक भी साल 2012 में इस जगह का शोध कर हैरान रह गये क्योंकि दुनिया भर में पेरू के माचू पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग के बाद कसार देवी ही एकमात्र स्थान है जहां विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं।

इतिहासकार और पर्यावरण के जानकार प्रोफेसर अजय रावत के मुताबिक कसार देवी के आस-पास के क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है। यहां विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं जो ध्यान और तप के लिये इसे एक उत्तम स्थान बनाती हैं।

अल्मोड़ा शहर से तकरीबन दस किलोमीटर दूर माता के इस मंदिर का खास महत्व है। कहा जाता है कि तकरीबन ढाई हजार साल पहले शुंभ-निशुंभ नामक दो राक्षसों का वध करने के लिये मां दुर्गा कात्यायनी रूप में खुद इस स्थान पर प्रकट हुई थीं।

मंदिर के भीतर पहाड़ का वो हिस्सा आज भी सिंह रूप में मौजूद है। मंदिर के पुजारी हेम चंद जोशी भी इस बात को पुख्ता तराके से बता रहे हैं।

कसार देवी मंदिर और उसके आस-पास के क्षेत्र के विशेष चुम्बकीय शक्तियों की वजह से ध्यान और तप के लिये विशेष तवज्जो दी जाती है।

खास बात ये है कि स्वामी विवेकानंद भी इस जगह पर ध्यान में लीन हो गये थे। कोलकाता से आये पर्यटक विकास चौधरी भी स्वामी विवेकानंद के बारे में सुनकर कसार देवी शक्तिपीठ में दर्शन करने पहुंचे हैं। बातचीत में बताया कि ये स्थान अपने आप में अनोखा है।

कसार देवी मंदिर के आस-पास का पूरा क्षेत्र हिमालयी के वन और अद्भुत नजारे से घिरा हुआ है। बड़ी संख्या में देशी पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां आते हैं। बिनसर और आस-पास तमाम विदेशी पर्यटक रोजाना भ्रमण करते दिखाई भी पड़ते हैं। कुछ लोग बताते हैं कि बड़ी संख्या में विदेशी साधकों ने अस्थाई ठिकाना भी यहां बना लिया है।

जाहिर है सुंदर हिमालयी नजारे के साथ अद्भुत शक्तियों से सराबोर इस स्थान को धार्मिक पर्यटन और ध्यान केन्द्र के रूप में और अधिक बेहतर बनाया जा सकता है लेकिन आस-पास सुविधाओं का अभाव है। सरकार यदि ध्यान दे तो ये स्थान न सिर्फ पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है बल्कि ध्यान केन्द्र के रूप में भी पूरी दुनिया में अपना अलग मुकाम बना सकता है।

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