किलमोड़ा, पूरा पौधा होता है औषधीय गुणों से भरपूर

किलमोड़ा, पूरा पौधा होता है औषधीय गुणों से भरपूर

जिस किलमोड़ा के पौधों को कंटीली झाड़ी कहकर पहाड़ में उपेक्षित छोड़ दिया जाता है, उसी से दुनियाभर में जीवन रक्षक दवाएं तैयार हो रही हैं।

जड़ी-बूटी के उत्पादन व संरक्षण में जुटे बागेश्वर के एक ग्रामीण ने किलमोड़ा की झाड़ियों से तेल तैयार किया है। खास बात यह है कि शुद्धता के कारण यह तेल लखनऊ की दवा बनाने वाली एक कंपनी को बेहद पसंद आया है।

वनस्पति विज्ञान में बेरवेरीज एरिस्टाटा को पहाड़ में किलमोड़ा के नाम से जाना जाता है। इसकी करीब 450 प्रजातियां दुनियाभर में पाई जाती हैं। भारत, नेपाल, भूटान और दक्षिण-पश्चिम चीन सहित अमेरिका में भी इसकी प्रजातियां हैं।

किलमोड़ा का पूरा पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी जड़, तना, पत्ती, फूल और फलों से विभिन्न बीमारियों में उपयोग आने वाली दवाएं बनाई जाती हैं। मुख्य रूप से इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी ट्यूमर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल तत्व पाए जाते हैं। मधुमेह के इलाज में इसका सबसे अधिक उपयोग होता है।

करीब सात किलो किलमोड़ा की लकड़ियों से दो सौ ग्राम तेल तैयार होता है।

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