उत्तराखण्ड का बहुमूल्य उत्पाद- लाल चावल

उत्तराखण्ड का बहुमूल्य उत्पाद- लाल चावल

वैसे तो राज्य की राजधानी देहरादून के वासमती चावल देश – विदेश में प्रसिद्ध है लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों में उगाए जाने वाले लाल चावलों के बारे में कम ही लोग जानते हैं।

जहां तक चावल उत्पादन में भारत की बात की जाय तो लगभग एक तिहाई जनसंख्या चावल के व्यवसायिक उत्पादन अन्तर्गत है, परन्तु हिमालयी राज्यों तथा बिहार, झारखण्ड, तमिलनाडु तथा केरल में कुछ पारम्परिक प्राचीन चावल की प्रजातियां आज भी मौजूद है, जिनको स्थानीय लोग आज भी उगाते हैं व उपयोग करते हैं।

इन्ही में से एक बहुमूल्य प्रजाति लाल चावल है, जिसकी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में बृहद मांग रहती है। जहां तक रंगीन (Pigmented) चावल की बात की जाय तो भारत के विभिन्न राज्यों में विभिन्न रंग के चावल जैसे कि हरा, बैंगनी, भूरा तथा लाल चावल आदि उत्पादन किया जाता है साथ ही उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में लाल चावल का उत्पादन किया जाता है। उत्तराखण्ड के पुरोला में लाल चावल की पारम्परिक खेती की जाती है जिसको स्थानीय बाजार तथा कई देशो में खूब मांग रहती है। विश्व में दक्षिणी एशिया में Pigmented चावल पारम्परिक रूप से उगाया जाता है।

जहां तक लाल चावल तथा सफेद (Polished) चावल को पौष्टिकता की दृष्टि से तुलनात्मक विष्लेशण किया जाय तो सफेद चावल में प्रोटीन 6.8ग्राम0/100ग्राम0, लौह 1.2 मिग्रा0/100 ग्राम, जिंक 0.5 मिग्रा0/100ग्राम, फाईवर 0.6 ग्राम/100 ग्राम, जबकि लाल चावल में प्रोटीन 7.0 ग्राम/100 ग्राम फाईवर 2.0 ग्राम/100 ग्राम, लौह 5.5 मिग्रा0/100 ग्राम तथा जिंक 3.3 मिग्रा0/100 ग्राम तक पाये जाते है।

प्राचीन ग्रन्थ चरक संहिता में भी लाल चावल का उल्लेख पाया जाता है जिसमें लाल चावल को रोग प्रतिरोधक के साथ-साथ पोष्टिक बताया गया है। पोष्टिक तथा औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ लाल चावल में विपरीत वातावरण में भी उत्पादन देने कि क्षमता होती है। यह कमजोर मिटटी, कम या ज्यादा पानी तथा पहाड़ी ढालूदार आसिंचित खेतो में भी उत्पादित किया जा सकता है। लाल चावल में मौजूद गुणों के कारण ही वर्तमान में भी उच्च गुणवत्ता युक्त प्रजातियां के विकास के लिए Breeding तथा Genetic improvement के लिए लाल चावल का प्रयोग किया जाता है। विश्वभर में हुए कुछ ही अध्ययनों में लाल चावल का वैज्ञानिक विष्लेशण होने के प्रमाण मिले है जबकि लाल चावल antioxidant, Arteriosclerosis-Preventive तथा Anticancer के निवारण के लिए अच्छी क्षमता रखता है।

वर्तमान में भी भारत में स्थानीय बाजार में लाल चावल 50 रूपये/किग्रा0 तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैविक लाल चावल 250/किग्रा0 तक बेचा जाता है। यदि उत्तराखण्ड के सिंचित तथा असिंचित दशा में मोटे धान की जगह पर यदि लाल चावल को व्यवसायिक रूप से उत्पादित किया जाय तो यह राज्य में बेहतर अर्थिकी का स्रोत बन सकता है।

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