माँ भगवती कोट भ्रामरी (कोटक माई) का मंदिर अल्मोड़ा से ग्वालदम जानेवाले रास्ते पर बैजनाथ से 3 कि.मी. की दूरी पर ऊँची चोटी पर स्थित है। इस स्थान पर कभी कत्यूरी राजाओं ने अपना किला बनवाया था। गढ़वाल यात्रा के समय जगतगुरु शंकराचार्य भी इस स्थान पर कत्यूरी राजाओं केRead More →

पहले रंगवाली पिछौड़ा घर पर ही मलमल, कौटन वाईल, चिकन फ़ैब या किसी अन्य हल्के सूती फ़ैब्रिक पर रंगकर बनाया जाता था। सबसे पहले सफ़ेद सूती कपड़े को धोकर सुखाया जाता था तथा फ़िर उसे पीले रंग से डाई किया जाता था। रगने के लिए मुख्य रूप से दो रंगRead More →

भारतीय महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में दुपट्टा (ओढ़नी) विशेष महत्व रखता है, देश के अन्य अंचलों की तरह ही उत्तराखण्ड के विभिन्न अंचलों में यह परंपरागत रूप से महिलाओं द्वारा पहना जाता है। कुमाऊं अंचल में यहां की स्थानीय भाषा में पिछोड़ा कहते हैं, पिछौड़ा अर्थात दुपट्टा या ओढनी। यहांRead More →

नन्दा देवी राजजात भारत के उत्तराखंड राज्य में होने वाली एक नन्दा देवी की एक धार्मिक यात्रा है। यह उत्तराखंड के कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। आमतौर पर हर 12 वर्ष पर होती है, जो अन्तिम राजजात यात्रा हुवी थी वो सन् 2014 में हुयी थी,Read More →

बसंत के पूजन की यह परंपरा असल में रोम से शुरू हुई थी। रोम की पौराणिक कथाओं के अनुसार फूलों की देवी का नाम ‘फ्लोरा’ था। इसको लेकर वहां कुछ कहानियां भी हैं। वहां फूलों से सजी एक खूबसूरत किशोरी के रूप में बसंत को पूजा जाता है। ‘फ्लोरा’ शब्दRead More →

वैसे तो राज्य की राजधानी देहरादून के वासमती चावल देश – विदेश में प्रसिद्ध है लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों में उगाए जाने वाले लाल चावलों के बारे में कम ही लोग जानते हैं। जहां तक चावल उत्पादन में भारत की बात की जाय तो लगभग एक तिहाई जनसंख्या चावल केRead More →

जो लोग उत्तराखण्ड़ के हैं उन्हें तो ये शब्द समझ आ जाएंगे लेकिन अगर आप उत्तराखण्ड़ी बोली नहीं जानते हैं और आप उत्तराखण्ड़ घूमने आ रहे हैं तो आप भी जान लें इन शब्दों का मतलब। उत्तराखण्ड़ में आमतौर पर पहाड़ और घाटी होती है। इसलिए रास्ते भी थोड़े टेड़ेRead More →

होली सैकड़ों वर्षों  से रंग-गुलाल, मस्ती और पकवानों का त्योहार रहा है। उत्तराखंड का संस्कृति सचेतन इलाका कुमाऊं और गढ़वाल-दोनों जगह पवित्र पौधे की डाल लाकर लगाने, पूजने, चीर बांधने-बांटने,बैठी-खड़ी होले का फर्क निभाने और महिलाओं का स्वांग निभाने आदि अनेक ऐसी चीजें हैं जो बहुत ही खास है और होली में गायन  इसेRead More →